विनायक दामोदर सावरकर

विनायक दामोदर सावरकर एक हिंदुत्ववादी स्वतंत्रता समर्थक कार्यकर्ता, वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाट्यलेखक थे। उनका जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक में एक मराठी चितपावन हिन्दू ब्राह्मण परिवार में हुआ। उन्हें वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है। सावरकर को ‘ वीर ‘ नाम मात्र 12 वर्ष की आयु में मिला, जब उन्होंने मुसलमानो द्वारा किये गए हमले के विरुद्ध डट कर सामना किया और अपने साथियों को भी अंत तक लड़ने के लिए प्रेरित किया। उनके माता पिता की अकालघटित मृत्यु के पश्चात पूरे परिवार की जिम्मेदारी सावरकर के बड़े भाई गणेश पर आ गयी। जिन्होंने विनायक को उनके हर कार्य में समर्थन दिया। उन्होंने ‘ हिंदुत्व ‘ शब्द को , हिन्दुओं की भारत में एक सामूहिक रूप से पहचान बनाने के लिए परिभाषित किया।
अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा के दौरान उन्हें ब्रिटिश राज से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त करने की जिज्ञासा जागृत हुयी, पुणे में उन्होंने ̔अभिनव भारत सोसाइटी ̕का गठन किया। उन्होंने भारत में स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा दिया, साथ ही अपने साथियो को भी स्वतंत्रता के लिए अभिलाषित किया, सावरकर पहले स्वतंत्रता सेनानी व राजनेता थे जिसने विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी। सावरकर को 50 वर्ष के कारावास की सजा हुयी। उन्होंने अपने कारावास के दिनों में ‘ द ट्रांसपोर्टेशन ऑफ़ माई लाइफ ‘ नामक चरित्ररचना की। उनको महात्मा गाँधी की हत्या की साजिश करने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा, परन्तु बाद में उन्हें आरोपमुक्त किया गया। 8 नवम्बर 1963 के दिन सावरकर की पत्नी का देहांत हुआ जिसके बाद वीर सावरकर ने अन्न, जल और दवाइयां सब का त्याग दिया और आत्मार्पन का निश्चय किया। अपनी मृत्यु से पहले उन्होंने एक लेख लिखा जिसका नाम था ‘ आत्महत्या नहीं आत्मार्पण’, जिसमें उनका कहना था कि जब जीवन लक्ष्य समाप्त हो जाए तथा समाज के लिए और कुछ करने की क्षमता क्षीण हो जाए तब मृत्यु की राह देखने से बेहतर है, इस जीवन का अंत कर देना। और 83 की आयु में उनका जीवनकाल समाप्त हुआ और वे मृत्यु को प्राप्त हुए।